रवि ने इंजीनियरिंग पास की तो उसका कैंपस सेलेक्शन एक अच्छी कंपनी में हो गया। रवि सिविल इंजीनियर था। कंपनी की तरफ से उसे झारखंड के एक आदिवासी बहुल इलाके में चल रहे प्रोजेक्ट पर भेजा गया। वहाँ कंपनी के अन्य कर्मचारी भी रहते थे। रवि के अलावा लगभग बीस लोग और थे। सबका अपना-अपना काम था।
वह इलाका जंगलों से घिरा हुआ था। आदिवासी लोगों के रीति-रिवाज और नियम बाकी समाज से काफी अलग थे। कंपनी की तरफ से सभी कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी गई थी कि अंधेरा होने के बाद कोई भी कैंपस से बाहर नहीं जाएगा। वहाँ जंगली जानवरों का भी खतरा था और आदिवासी समाज के अपने नियम भी थे। इसलिए सभी कर्मचारी इस बात का ध्यान रखते थे।
कंपनी कैंपस के अंदर ही कर्मचारियों के रहने, खाने-पीने और काम की व्यवस्था थी। वहाँ मैस में काम करने वाला कुक स्थानीय आदिवासी था। वह अक्सर आदिवासी समाज की बातें सुनाया करता था।
एक दिन उसने बताया, “हमारे समाज में औरत और मर्द दोनों बराबर माने जाते हैं। दोनों मिलकर मेहनत करते हैं और घर चलाते हैं। कुछ जनजातियों में यह परंपरा भी है कि अगर लड़की का छोटा भाई नाबालिग हो, तो दूल्हे को कई साल तक ससुराल में रहना पड़ता है। जब तक भाई बड़ा नहीं हो जाता, तब तक वह अपनी पत्नी को लेकर अपने घर नहीं जा सकता।”
रवि उन अनोखी परंपराओं को सुनकर हैरान रह जाता था।
एक दिन रवि के साथ काम करने वाला अमर पूरे दिन कैंपस में दिखाई नहीं दिया। रात को जब सब लोग खाने के लिए इकट्ठा हुए तो पता चला कि अमर अभी तक वापस नहीं आया है। सबको चिंता होने लगी। जंगल और जंगली जानवरों के कारण सब परेशान थे।
सुबह होते ही लोग अमर को ढूँढ़ने निकलने वाले थे कि तभी कैंपस के बाहर हलचल हुई। सबने देखा—अमर चला आ रहा था, और उसके साथ एक आदिवासी लड़की भी थी। पाँच-छह आदिवासी युवक उन्हें छोड़ने आए थे। थोड़ी देर बाद वे लोग वापस चले गए।
सबने हैरानी से अमर से पूछा, “ये सब क्या है?”
अमर ने थकी हुई आवाज़ में कहा, “एक महीने पहले मैं जंगल में फोटो खींचने गया था। वहीं मेरी मुलाकात इस लड़की से हुई थी। इसका नाम कमला है। यह हिंदी जानती है। मैंने इससे जंगल से बाहर जाने का रास्ता पूछा था। इसने मेरी मदद की थी।”
वह थोड़ा रुका और फिर बोला, “पंद्रह दिन पहले भी यह मुझे जंगल में मिली थी। हमारी थोड़ी-बहुत बातें हुई थीं। कल मैं फिर फोटो खींचने गया था। शाम हो गई और लौटते समय मुझे रास्ते में एक शेर दिखाई दिया। डर के मारे मैं छिप गया। काफी देर बाद जब शेर वहाँ से गया, तब तक अंधेरा हो चुका था। मैं रास्ता भटक गया। तभी मुझे एक झोपड़ी दिखाई दी। जंगली जानवरों से बचने के लिए मैं उसके अंदर चला गया। मुझे नहीं पता था कि कमला भी उसी झोपड़ी में है।”
सब लोग ध्यान से उसकी बात सुन रहे थे।
अमर ने आगे कहा, “थोड़ी देर बाद गाँव वाले कमला को ढूँढ़ते हुए वहाँ पहुँच गए। उन्होंने हम दोनों को साथ देखा और गलत समझ लिया। हमने बहुत समझाने की कोशिश की कि हम वहाँ जानबूझकर साथ नहीं थे, लेकिन उन्होंने हमारी एक नहीं सुनी। जबरदस्ती हमारी शादी करा दी और विदा करके यहाँ तक छोड़ गए।”
कुछ देर के लिए वहाँ सन्नाटा छा गया।
तभी किसी ने पूछा, “अब तुम क्या करोगे?”
अमर ने धीरे से कहा, “मैं कमला को पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता।”
सबकी नजरें कमला की ओर चली गईं।
कमला ने शांत स्वर में कहा, “मैं अब अपने गाँव वापस नहीं जा सकती। लेकिन मैं अमर जी पर बोझ भी नहीं बनना चाहती। मैं पढ़ना चाहती हूँ।”
कमला बारहवीं तक पढ़ी हुई थी। अमर ने उसकी मदद की और शहर के एक कॉलेज में उसका दाखिला करा दिया। कमला छात्रावास में रहने लगी। बाद में अमर और कमला ने कोर्ट में जाकर अपने विवाह को शून्य घोषित करवा लिया।
कमला पढ़ाई में बहुत अच्छी थी। उसने बीए के प्रथम वर्ष में अच्छे अंक प्राप्त किए। पढ़ाई के साथ-साथ वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करने लगी।
इसी बीच अमर का तबादला दूसरे प्रोजेक्ट में हो गया और वह वहाँ से चला गया।
तीन साल बाद सीमेंट प्लांट बनकर तैयार हो गया। वहाँ उत्पादन शुरू हो चुका था। अब कंपनी की बड़ी टाउनशिप बस चुकी थी। कर्मचारी अपने परिवारों के साथ कंपनी द्वारा दिए गए क्वार्टरों में रहते थे। हालाँकि, शाम के बाद कैंपस से बाहर जाना अब भी मना था।
समय के साथ लोग अमर और कमला की कहानी भूलने लगे।
एक बार रवि को उसी प्रोजेक्ट में भेजा गया जहाँ अमर काम कर रहा था। अमर को देखते ही रवि को कमला की याद आ गई।
उसने मुस्कुराते हुए पूछा, “कैसे हो? शादी हुई या नहीं?”
अमर मुस्कुराया और बोला, “हाँ, होने वाली है। रमा नाम है उसका। वह भी इंजीनियर है और मेरे साथ यहीं काम करती है। दोनों परिवारों की रजामंदी से शादी हो रही है।”
रवि ने फिर पूछा, “और कमला?”
अमर के चेहरे पर संतोष दिखाई दिया।
उसने कहा, “कमला ने बीए पूरा करने के साथ-साथ सरकारी नौकरी की तैयारी भी की। उसने आयकर विभाग की परीक्षा पास कर ली। दो महीने पहले उसने आयकर विभाग में ऑफिसर के पद पर ज्वाइन किया है।”
रवि खुश हो गया।
अमर ने आगे कहा, “मैंने रमा और कमला दोनों को एक-दूसरे से मिलवाया था। कमला अब मेरी बहुत अच्छी दोस्त है। उसके माता-पिता भी उससे मिलने आते रहते हैं। हमने उन्हें सारी सच्चाई बता दी थी। वे समझ गए। लेकिन कमला अब अपने पुराने गाँव वापस नहीं जा सकती।”
एक साल बाद रवि को पता चला कि अमर की शादी रमा से हो गई। वहीं कमला ने भी अपने साथ काम करने वाले अधिकारी नितिन से विवाह कर लिया।
अमर और कमला दोनों अपने-अपने जीवनसाथियों के साथ खुश थे।
रवि जब भी उस घटना को याद करता, उसे लगता कि आदिवासी समाज की परंपराएँ सचमुच बहुत अनोखी होती हैं। लेकिन उससे भी बड़ी बात यह थी कि कठिन परिस्थितियों में भी इंसान अगर हिम्मत और समझदारी से काम ले, तो वह अपनी जिंदगी को नई दिशा दे सकता है।
