Anju Ka Pitara

रिश्ते

दो बहनों की शादी एक ही घर में हुई। जब तक सब खुश थे, रिश्ते मजबूत थे — पर जब एक रिश्ता टूटा, उसकी चोट कई दिलों तक पहुँची।

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नीलम आज बहुत खुश थी। उसकी छोटी बहन नीतू की शादी उसके देवर अमर से हो रही थी। चार साल पहले नीलम की शादी गगन से हुई थी। यह एक अरेंज मैरिज थी। कई लड़के-लड़कियों से मिलने के बाद नीलम और गगन ने एक-दूसरे को पसंद किया था। दोनों परिवारों ने खुशी-खुशी उनकी शादी धूमधाम से कर दी।

नीलम और गगन का वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा था। नीलम के मायके और ससुराल के रिश्ते भी बहुत मधुर थे। नीलम और गगन की शादी के दौरान अमर और नीतू ने एक-दूसरे को खूब चिढ़ाया और मज़ाक किया था। धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हो गई और फिर वही दोस्ती प्यार में बदल गई।

कुछ समय बाद अमर और नीतू ने नीलम और गगन से कहा, “हम दोनों शादी करना चाहते हैं, हमारी मदद करो।”

जब दोनों परिवारों को यह बात पता चली तो सब बहुत खुश हुए। जल्द ही नीतू और अमर की शादी हो गई। दोनों अपने नए जीवन में बहुत खुश थे।

दो साल बीत गए। नीलम के बेटे यश का जन्म हुआ और नीतू की बेटी पिहू इस दुनिया में आई। नीलम का बेटा चार साल का था और पिहू एक साल की। दोनों परिवार मिलजुलकर खुशी से रह रहे थे।


इसी बीच अमर को कंपनी की तरफ से दो साल के लिए कनाडा जाने का अवसर मिला। अमर, नीतू और उनकी बेटी पिहू कनाडा चले गए। उनके जाने से सभी उदास तो थे, लेकिन अमर की तरक्की से खुश भी थे।

कनाडा पहुँचने के बाद शुरू में सब ठीक रहा। अमर नौकरी में व्यस्त रहने लगा और नीतू घर व पिहू को संभालने में। लगभग एक साल तक उनका जीवन सामान्य चला, लेकिन धीरे-धीरे अमर बदलने लगा। वह शराब पीने लगा और छोटी-छोटी बातों पर नीतू से झगड़ने लगा।

नीतू ने उसे बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उसे लगता था कि भारत लौटने के बाद सब ठीक हो जाएगा। मगर समय के साथ झगड़े बढ़ते गए।

जब भारत लौटने में चार महीने बाकी थे, कंपनी ने अमर को कनाडा में एक साल और रुकने का प्रस्ताव दिया। अमर वहाँ रुकना चाहता था, लेकिन नीतू वापस भारत आना चाहती थी। इसी बात पर दोनों के बीच बड़ा झगड़ा हुआ। गुस्से में अमर ने नीतू पर हाथ भी उठा दिया।

टूटी हुई नीतू ने यह बात अपनी बहन नीलम को बताई। नीलम ने उसे समझाया, “तू एक महीने के लिए भारत आ जा। जब अमर को तेरी और पिहू की कमी महसूस होगी, वह खुद वापस आ जाएगा।”

नीतू पिहू को लेकर भारत लौट आई। परिवार वाले उसे देखकर खुश तो थे, लेकिन उसकी हालत देखकर दुखी भी थे। उसने सबको बताया कि अमर अब पहले जैसा नहीं रहा।

चार महीने बीत गए, लेकिन अमर वापस नहीं आया। उसने कनाडा में एक साल और रहने का फैसला कर लिया। धीरे-धीरे उसने नीतू और पिहू से बात करना भी बंद कर दिया।

समय बीतता गया। पिहू चार साल की हो गई। नीतू अपने मायके में रहकर नौकरी करने लगी और अपनी बेटी को संभालने लगी।


जब अमर भारत वापस आया तो उसने साफ कह दिया, “मैं नीतू के साथ नहीं रहना चाहता। मुझे तलाक चाहिए।”

नीतू ने भी शांत स्वर में कहा, “मैं भी अब अमर के साथ नहीं रहना चाहती।”

दोनों परिवारों ने रिश्ता बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिरकार अमर और नीतू का तलाक हो गया। पिहू की कस्टडी नीतू को मिली। अदालत ने अमर को पिहू की पढ़ाई के लिए पचास लाख रुपये देने का आदेश दिया। नीतू ने अपने लिए अमर से कुछ भी लेने से मना कर दिया, लेकिन पिहू के भविष्य और पढ़ाई के लिए उसने वह पैसे स्वीकार कर लिए।

इस टूटे रिश्ते का असर नीलम और गगन के रिश्ते पर भी पड़ा। घर में तनाव रहने लगा। उनका बेटा यश भी डरने लगा कि कहीं उसके मम्मी-पापा भी अलग न हो जाएँ। लेकिन नीलम और गगन ने समझदारी से काम लिया। उन्होंने अपने रिश्ते को टूटने नहीं दिया और अपने बेटे को प्यार और भरोसा दिया।

समय बीतने लगा। दोनों परिवारों ने अमर और नीतू को दूसरी शादी के लिए समझाया, लेकिन दोनों ने मना कर दिया।

दो साल बाद अमर ने अपनी सहकर्मी अलका से शादी कर ली। शुरुआत में सब ठीक रहा, लेकिन कुछ समय बाद उनके बीच भी झगड़े शुरू हो गए। उनकी दो बेटियाँ हुईं — सोनिया और सारिका। फिर भी अमर और अलका का रिश्ता कभी शांत नहीं रह पाया।


उधर नीतू शादी के नाम से ही डरने लगी थी। उसे लगता था कि जब अमर जैसा इंसान बदल सकता है तो किसी और पर कैसे भरोसा किया जाए। लेकिन उसे अपनी बेटी पिहू की चिंता भी रहती थी।

नीतू के पापा के दोस्त का बेटा राजन पहले से ही नीतू को पसंद करता था। उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी। पहले वह अपने करियर में व्यस्त था, इसलिए शादी के बारे में नहीं सोच पाया। अब वह नीतू से शादी करना चाहता था।

नीतू के पापा ने दोनों से कहा, “पहले तुम लोग एक-दूसरे को समझो, फिर फैसला लेना। पिहू को भी इस रिश्ते में शामिल करना।”

लगभग एक साल तक नीतू, राजन और पिहू एक-दूसरे से मिलते रहे। धीरे-धीरे तीनों के बीच अपनापन बढ़ गया। जब उन्हें लगा कि वे साथ खुश रह सकते हैं, तब नीतू और राजन ने शादी कर ली।

शादी के बाद तीनों एक-दूसरे के जीवन का सहारा बन गए।

आज नीलम फिर से अपनी बहन नीतू के लिए खुश थी। लेकिन अमर के साथ उसका रिश्ता हमेशा के लिए टूट चुका था। वह अब अमर के घर नहीं जाती थी। यदि कभी कोई काम होता तो गगन अकेले चले जाते।

दो बहनों की शादी एक ही घर में हुई थी। जब तक सब खुश थे, रिश्ते भी मजबूत थे। लेकिन जब एक रिश्ता टूटा, तो उसकी चोट दूसरे रिश्तों तक भी पहुँची।

यही रिश्तों की सच्चाई है — एक रिश्ता टूटता है, तो उसकी आवाज़ कई दिलों तक सुनाई देती है।

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